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कोई जुबां नहीं होती...

हम शायरों की न कोई जुबां होती है। 
हर शेर यारों, जहां की दास्तां होती है।।

हर शायर होता है अशद 1 नदी की तरह।
नदी रुकती नहीं जब भी रवां 2 होती है।।

हम कहते हैं वहीं जो सुनते हो बार-बार।
हमारे नज्मों में पिरो कर वो नया होती हैं।।

जीतना है तुम्हे तो याद तुम यह रखना
गोरी 3 जैसी कोशिश ना कभी जाया 4 होती है।।

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1- तेज
2- बहना
3- मोहम्मद गोरी
4- बेकार

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